अन्धकार है, तो अन्धकार बोल के तो देख
सरकार है, तो सरकार बोल के तो देख
अब तो मैदान खुला है तुम्हारे लिए
फ़क़त मैदान में आ, तलवार-तलवार बोल के तो देख
उनके जूते का जूता बन न, अब तो
झूठ को झूठ और गद्दार को गद्दार बोल के तो देख
देख सुबह खड़ी है तेरे सामने
तू ख़बरदार है, तो ख़बरदार बोल के तो देख
रौशनी रौशनी, मैं दम-ब-दम हुआ
सामने मेरे, रफ़्तार-रफ़्तार बोल के तो देख
कोई नहीं आया चीर के आसमाँ यहाँ
एक बार, अवतार-अवतार बोल के तो देख
ज़िन्दगी भीख नहीं, अधिकार है
खुलेआम, अधिकार-अधिकार बोल के तो देख
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घरेलू स्त्री / ममता व्यास
जिन्दगी को ही कविता माना उसने जब जैसी, जिस रूप में मिली खूब जतन से पढ़ा, सुना और गुना... वो नहीं जानती तुम्हारी कविताओं के नियम लेकिन उ...
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Chôl Chôl Chôl Urddhô gôgône baje madôl Nimne utôla dhôrôni tôl Ôrun prater tôrun dôl Chôlre Chôlre Chôl Chôl Chôl Chôl.. Ushar dua...
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चाँदनी की पाँच परतें, हर परत अज्ञात है। एक जल में एक थल में, एक नीलाकाश में। एक आँखों में तुम्हारे झिलमिलाती, एक मेरे बन रहे विश्वास...
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It is raining a small rain A gentle rain over all the world Gentle like that love which is so hard to sustain or to receive or to reciproca...
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