Yesterday I shared the Baba Bulleh Shah's popular Punjabi folk song 'Tera Ishq Nachaiya' aka 'Thaiya Thaiya'. Singer Sukhwinder brought this song to AR Rahman, and in no time none other than Gulzar was put to task to rewrite this popular folk for a Bollywood lyric. Thus came into being one of the most memorable song of Indian cinema.
जिनके सर हो इश्क़ की छाँव
पाँव के नीचे जन्नत होगी
चल छैय्याँ छैय्याँ छैय्याँ छैय्याँ
सारे इश्क़ की छाँव, चल छैय्याँ छैय्याँ
पाँव जन्नत चले, चल छैय्याँ छैय्याँ
चल छैय्याँ छैय्याँ छैय्याँ छैय्याँ
वो यार है जो खुशबू की तरह
जिसकी ज़ुबाँ उर्दू की तरह
मेरी शाम रात, मेरी क़ायनात
वो यार मेरा सैंय्या सैंय्या
चल छैय्याँ छैय्याँ...
गुलपोश कभी इतराये कहीं
महके तो नज़र आ जाये कहीं
ताबीज़ बना के पहनूँ उसे
आयत की तरह मिल जाये कहीँ
वो यार है जो ईमाँ की तरह
मेरा नग़मा वही, मेरा कलमा वही
मेरा नग़मा नग़मा, मेरा कलमा कलमा
यार मिसाल-ए-आस चले
पाँव के तले फ़िरदौस चले
कभी डाल-डाल, कभी पात-पात
मैं हवा पे ढूँढूँ उसके निशाँ
सारे इश्क़ की छाँव...
मैं उसके रूप का शहदाई
वो धूप - छाँव सा हरजाई
वो शोख का रंग बदलता है
मैं रंग रूप का सौदाई
जिनके सर हो इश्क़ की छाँव
पाँव के नीचे जन्नत होगी
शाम रात, मेरी कायनात
वो यार मेरा सैय्याँ सैय्याँ
चल छैय्याँ छैय्याँ…
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