Tuesday, January 23, 2018

तेरे इश्क नचाइआ / बाबा बुल्ले शाह


बहुड़ीं वे तबीबा मैंडी जिन्द गईआ ।
तेरे इश्क नचाइआ कर थईआ थईआ ।

इश्क डेरा मेरे अन्दर कीता,
भर के ज़हर प्याला मैं पीता,
झबदे आवीं वे तबीबा नहीं ते मैं मर गईआं ।
तेरे इश्क नचाइआ कर थईआ थईआ ।

छुप्प गया सूरज बाहर रह गई आ लाली,
होवां मैं सदके मुड़ जे दें विखाली ,
मैं भुल्ल गईआं तेरे नाल ना गईआं ।
तेरे इश्क नचाइआ कर थईआ थईआ ।

तेरे इश्क दी सार वे मैं ना जाणां,
इह सिर आया ए मेरा हेठ वदाणां,
सट्ट पई इश्के दी तां कूकां दईआं ।
तेरे इश्क नचाइआ कर थईआ थईआ ।

एस इश्क दे कोलों सानूं हटक ना माए,
लाहू (लाहौर) जांदड़े बेड़े मोड़ कौन हटाए,
मेरी अकल भुल्ली नाल मुहाण्यां दे गईआं ।
तेरे इश्क नचाइआ कर थईआ थईआ ।

एस इश्क दी झंगी विच मोर बुलेंदा,
सानूं काबा ते किबला प्यारा यार दसेंदा,
सानूं घायल करके फिर खबर ना लईआ ।
तेरे इश्क नचाइआ कर थईआ थईआ ।

बुल्ल्हा शाह इनायत दे बह बूहे,
जिस पहनाए सानूं सावे सूहे,
जां मैं मारी उडारी मिल प्या वहिया ।
तेरे इश्क नचाइआ कर थईआ थईआ ।

Note: If you're finding some problem in following the poem in Punjabi, then here is an English translation by  Kartar Singh Duggal  on his blog.

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