Sunday, March 14, 2021
पुन्न के काम आये हैं / दिविक रमेश
सब के सब मर गए
उनकी घरवालियों को
कुछ दे दिवा दो भाई
कैसा विलाप कर रही हैं।
"कैसे हुआ ?"
वही पुरानी कथा
काठी गाल रहे थे
लगता है ढह पड़ी
सब्ब दब गये
होनी को कौन रोक सकता है
अरी, अब सबर भी करो
पुन्न के काम ही तो आये हैं
लगता है
कुआँ बलि चाहता था
"हाँ
जब भी कुआँ बलि चाहता है
बेचारे मजदूरों पर ही कहर ढहाता है।"
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