Monday, August 31, 2020
एक गुड़िया की कई कठपुतलियों में जान है / दुष्यंत कुमार
एक गुड़िया की कई कठपुतलियों में जान है
आज शायर यह तमाशा देखकर हैरान है
ख़ास सड़कें बंद हैं तब से मरम्मत के लिए
यह हमारे वक़्त की सबसे सही पहचान है
एक बूढ़ा आदमी है मुल्क़ में या यों कहो—
इस अँधेरी कोठरी में एक रौशनदान है
मस्लहत—आमेज़ होते हैं सियासत के क़दम
तू न समझेगा सियासत, तू अभी नादान है
इस क़दर पाबन्दी—ए—मज़हब कि सदक़े आपके
जब से आज़ादी मिली है मुल्क़ में रमज़ान है
कल नुमाइश में मिला वो चीथड़े पहने हुए
मैंने पूछा नाम तो बोला कि हिन्दुस्तान है
मुझमें रहते हैं करोड़ों लोग चुप कैसे रहूँ
हर ग़ज़ल अब सल्तनत के नाम एक बयान है
Sunday, August 30, 2020
A Minor Bird / Robert Frost
I have wished a bird would fly away,
And not sing by my house all day;
Have clapped my hands at him from the door
When it seemed as if I could bear no more.
The fault must partly have been in me.
The bird was not to blame for his key.
And of course there must be something wrong
In wanting to silence any song.
Saturday, August 29, 2020
First Memory / Louise Gluck
Long ago, I was wounded. I lived
to revenge myself
against my father, not
for what he was--
for what I was: from the beginning of time,
in childhood, I thought
that pain meant
I was not loved.
It meant I loved.
Friday, August 28, 2020
Torture / Alice Walker
When they torture your mother
plant a tree
When they torture your father
plant a tree
When they torture your brother
and your sister
plant a tree
When they assassinate
your leaders
and lovers
plant a tree
Whey they torture you
too bad
to talk
plant a tree.
When they begin to torture
the trees
and cut down the forest
they have made
start another.
Thursday, August 27, 2020
नारी प्रगति / पद्मजा बाजपेयी
नारी तुम्हारी प्रगति,
हर क्षेत्र में दिखने लगी,
पिसती चली थी, जो वह
अनेक उद्योगों को चलाती
आज चक्की मालकिन है,
पाठशाला स्कूल जाने को तरसती,
आज शिक्षिका वह स्वयं है।
अन्याय सहना नियति जिसकी
न्यायपीठ पर आसीन है।
गालियाँ मरने को मिलती जिसे,
वही देती जीवनदान है।
मातृत्व का वरदान उसको
रोमांच देता है सदा
हर काल में गरिमा बढ़ाता
मान दिलाता है सदा
मुश्किलें हटती गई
और वह बढ़ती गई।
समय का सिंबल मिला तो
पंख पर उड़ने लगी
वेषभूषा भी है बदली,
अब नहीं घूंघट में छिपती।
शौर्य की यदि बात निकले,
देश की रक्षा भी करती।
लेखिका है, गायिका है,
रूपसी और उर्वशी है,
प्रेयसी है, प्रियतमा भी
राग व अनुराग की वंदनीया है वही,
कौन है जो आज,
उसकी मोहिनी से मुकर जाए?
प्राथमिकता है यही
नारीत्व को उज्ज्वल बनायें
सृष्टि की इस पवित्र मूरत की
प्रगति चल राहे बुहारे।
सफल हो हर कार्य उसका,
जिस तरफ वह नजर उठाये।
Wednesday, August 26, 2020
मैनें दिल से कहा / जावेद अख़्तर
मैनें दिल से कहा
ऐ दीवाने बता
जब से कोई मिला
तू है खोया हुआ
ये कहानी है क्या
है ये क्या सिलसिला
ऐ दीवाने बता
मैनें दिल से कहा
ऐ दीवाने बता
धड़कनों में छुपी
कैसी आवाज़ है
कैसा ये गीत है
कैसा ये साज़ है
कैसी ये बात है
कैसा ये राज़ है
ऐ दीवाने बता
मेरे दिल ने कहा
जब से कोई मिला
चाँद तारे फ़िज़ा
फूल भौंरे हवा
ये हसीं वादियाँ
नीला ये आसमाँ
सब है जैसे नया
मेरे दिल ने कहा
Tuesday, August 25, 2020
बिटिया बड़ी हो गई / अंजना बख्शी
देख रही थी
उस रोज़ बेटी को
सजते-सँवरते
शीशे में अपनी
आकृति घंटों निहारते
नयनों में आस का
काजल लगाते,
उसके दुपट्टे को
बार-बार सरकते
और फिर अपनी उलझी
लटों को सुलझाते
हम उम्र लड़कियों के
साथ हँसते-खिलखिलाते।
माँ से अपनी हर बात छिपाते
अकेले में ख़ुद से
सवाल करते,
फिर शरमा के,
सर को झुकाते।
और फिर कभी स्तब्ध
मौन हो जाते;
कभी-कभी आँखों
से आँसू बहाते
फिर दोनों हाथों से
मुँह को छिपाते ।
देखकर सोचती हूँ उसे
लगता है,
बिटिया अब बड़ी
हो गई है!!
Subscribe to:
Posts (Atom)
घरेलू स्त्री / ममता व्यास
जिन्दगी को ही कविता माना उसने जब जैसी, जिस रूप में मिली खूब जतन से पढ़ा, सुना और गुना... वो नहीं जानती तुम्हारी कविताओं के नियम लेकिन उ...
-
Chôl Chôl Chôl Urddhô gôgône baje madôl Nimne utôla dhôrôni tôl Ôrun prater tôrun dôl Chôlre Chôlre Chôl Chôl Chôl Chôl.. Ushar dua...
-
चाँदनी की पाँच परतें, हर परत अज्ञात है। एक जल में एक थल में, एक नीलाकाश में। एक आँखों में तुम्हारे झिलमिलाती, एक मेरे बन रहे विश्वास...
-
All about the country, From earliest teens, Dark unmarried mothers, Fair game for lechers — Bosses and station hands, And in town and city...