Monday, September 7, 2020

Since Hanna Moved Away / Judith Viorst

The tires on my bike are flat.
The sky is grouchy gray.
At least it sure feels like that
Since Hanna moved away.

Chocolate ice cream tastes like prunes.
December's come to stay.
They've taken back the Mays and Junes
Since Hanna moved away.

Flowers smell like halibut.
Velvet feels like hay.
Every handsome dog's a mutt
Since Hanna moved away.

Nothing's fun to laugh about.
Nothing's fun to play.
They call me, but I won't come out
Since Hanna moved away.

Sunday, September 6, 2020

From Four Till Seven / Marina Ivanovna Tsvetaeva

Like in a mirror, there's shade in the heart
I'm bored alone - and with men…
Slowly drags the light of the day
From four till seven!
Everybody is cruel in the dusk,
Don't go to people - they'll lie.
Fingers have wound into a knot
The kerchief. I want to cry.
Only don't torture me so,
If you hurt me I'll forgive!
From four till seven o'clock
I endlessly grieve.

Saturday, September 5, 2020

चाह एक शिक्षक की / भारती पंडित

जानती हूँ मैं कि दहलीज पर खड़ी हो तुम,
दस्तक देने को तैयार शायद करती हो इंतज़ार
कि द्वार खुलेगा और थाम लोगी हाथ मेरा
और ले जाओगी महाप्रयाण के उस अनंत पथ पर
जहां से वापसी संभव नहीं,आसान नहीं
पर हे मृत्यु की देवी, तुम्हीं से मांगती हूँ
जीवन के कुछ क्षणों का अमूल्य वरदान
यद्यपि नहीं है अधूरा कोई सपना
नहीं है अधूरी कोई भी चाह
ना ही है आस बिटिया के विवाह की,
ना ही दिखाना है बेटे को सुनहली राह
बस इतना ही है काम बाकी कि
ज्ञान के जो अनमोल मोती सहेजे है
इस जीवन प्रवास में
डालती जाऊं किसी सुपात्र की झोली में
जो उन मोतियों को पल्लवित करें
बीजों की तरह और
लहलहा दे उन्हें उस वृक्ष की तरह
शिक्षा, सभ्यता और अनुशासन हो जिसके फल
संस्कार, देशप्रेम और जीवन मूल्यों से
जो हो सुगठित,सबल
बस इतना सी है स्वार्थ मेरा
क्योंकि फल खाने वालों के संतोष में
होगा एक हिस्सा मेरा भी
गुमनाम ही सही, कहीं तो स्मृति होगी मेरी
नींव सी ही सही, हस्ती तो होगी मेरी.

Friday, September 4, 2020

A Light Exists In Spring / Emily Dickinson

A light exists in spring
Not present on the year
At any other period.
When March is scarcely here

A color stands abroad
On solitary hills
That science cannot overtake,
But human naturefeels.

It waits upon the lawn;
It shows the furthest tree
Upon the furthest slope we know;
It almost speaks to me.

Then, as horizons step,
Or noons report away,
Without the formula of sound,
It passes, and we stay:

A quality of loss
Affecting our content,
As trade had suddenly encroached
Upon a sacrament.

Thursday, September 3, 2020

The Bridge / Octavio Paz

Between now and now,
between I am and you are,
the word bridge.

Entering it
you enter yourself:
the world connects
and closes like a ring.

From one bank to another,
there is always
a body stretched:
a rainbow.
I'll sleep beneath its arches.

Wednesday, September 2, 2020

नया शिवाला / अल्लामा इक़बाल

सच कह दूँ ऐ बरहमन गर तू बुरा न माने
तेरे सनम-कदों के बुत हो गए पुराने
अपनों से बैर रखना तू ने बुतों से सीखा
जंग-ओ-जदल सिखाया वाइज़ को भी ख़ुदा ने
तंग आ के मैं ने आख़िर दैर ओ हरम को छोड़ा
वाइज़ का वाज़ छोड़ा छोड़े तिरे फ़साने
पत्थर की मूरतों में समझा है तू ख़ुदा है
ख़ाक-ए-वतन का मुझ को हर ज़र्रा देवता है

आ ग़ैरियत के पर्दे इक बार फिर उठा दें
बिछड़ों को फिर मिला दें नक़्श-ए-दुई मिटा दें
सूनी पड़ी हुई है मुद्दत से दिल की बस्ती
आ इक नया शिवाला इस देस में बना दें
दुनिया के तीरथों से ऊँचा हो अपना तीरथ
दामान-ए-आसमाँ से इस का कलस मिला दें
हर सुब्ह उठ के गाएँ मंतर वो मीठे मीठे
सारे पुजारियों को मय पीत की पिला दें
शक्ति भी शांति भी भगतों के गीत में है
धरती के बासीयों की मुक्ती प्रीत में है

Tuesday, September 1, 2020

एक आशीर्वाद / दुष्यंत कुमार

जा तेरे स्वप्न बड़े हों।

भावना की गोद से उतर कर
जल्द पृथ्वी पर चलना सीखें।

चाँद तारों सी अप्राप्य ऊचाँइयों के लिये
रूठना मचलना सीखें।

हँसें
मुस्कुराएँ
गाएँ।

हर दीये की रोशनी देखकर ललचायें
उँगली जलाएँ।
अपने पाँव पर खड़े हों।
जा तेरे स्वप्न बड़े हों।

घरेलू स्त्री / ममता व्यास

जिन्दगी को ही कविता माना उसने जब जैसी, जिस रूप में मिली खूब जतन से पढ़ा, सुना और गुना... वो नहीं जानती तुम्हारी कविताओं के नियम लेकिन उ...